स्वर्गीय गोपाल तिवारी की दसवीं पुण्यतिथि

  स्व. गोपाल तिवारी की दसवीं पुण्यतिथि 


गोपाल आईटीआई के संस्थापक स्व. गोपाल तिवारी की दसवीं पुण्यतिथि पर 370 जरूरतमंदों को कंबल वितरण

सुखपुरा (बलिया)। 

गोपाल आईटीआई के संस्थापक स्वर्गीय गोपाल तिवारी की दसवीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाते हुए 370 जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वर्गीय गोपाल तिवारी की धर्मपत्नी हीरा मनी देवी द्वारा उनके तेल चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद मुख्य अतिथि सपा के वरिष्ठ नेता अनिल राय एवं विशिष्ट अतिथि आनंद सिंह ने संयुक्त रूप से जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए। कंबल पाकर जरूरतमंदों के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि अनिल राय ने अपने संबोधन में कहा कि आज के युग में माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें योग्य बनाते हैं, उसी प्रकार संतान का भी कर्तव्य है कि वे वृद्धावस्था में अपने माता-पिता की सेवा और देखभाल करें। यही सच्ची श्रद्धांजलि है और यही संस्कार समाज को मजबूत बनाते हैं।

विशिष्ट अतिथि आनंद सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, वह जीवन में सदैव सुखी और समृद्ध रहता है। उन्होंने कहा कि समाज में पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है और ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रधान प्रतिनिधि टाइगर तिवारी, अरविंद पांडेय साहब जी, धर्मेंद्र वर्मा, शिवानंद वर्मा, गोवर्धन राय, अशोक तिवारी, जब्बार वर्मा, टुनटुन राजभर, विनोद राजभर, संजय बीडीसी, रितेश तिवारी, प्रवीण तिवारी, दुर्गेश राय, राजू राय, व्यास जी, गिरीश तिवारी, दया श्रीवास्तव, मिंटू तिवारी समेत दर्जनों लोगों ने स्वर्गीय गोपाल तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम का संचालन राजा बाबू राय ने किया, जबकि अंत में आईटीआई के प्रबंधक धर्मेंद्र तिवारी ‘डुलडुल’ ने उपस्थित सभी अतिथियों और लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय गोपाल तिवारी के आदर्शों और सामाजिक सोच को आगे बढ़ाना ही उनका उद्देश्य है। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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