श्री राम कथा का सातवां विश्राम दिवस भक्ति, भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा

श्री राम कथा का सातवां विश्राम दिवस भक्ति, भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा

 लीलकर की तपोभूमि में रामनाम का अनुपम उत्सव: महायज्ञ का आठवां दिन, कथा का सातवां विश्राम

सिकंदरपुर (बलिया)।


सिकंदरपुर क्षेत्र के लीलकर गांव में ब्रह्मलीन संत श्री श्री 1008 परमहंस श्री स्वामी गंगाधर शास्त्री जी महाराज की पावन तपोस्थली पर चल रहे 9 दिवसीय श्री सीताराम महायज्ञ का आठवां दिन और श्री राम कथा का सातवां विश्राम दिवस भक्ति, भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। महायज्ञ की पूर्णाहुति 13 फरवरी को विधि-विधान से संपन्न होगी।

राम राज्याभिषेक के साथ कथा का भावपूर्ण समापन

कथा वाचिका सुश्री आरती पाठक  ने भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया। उन्होंने अत्यंत मार्मिक ढंग से बताया कि जब राजा दशरथ ने दर्पण में अपने श्वेत केश देखे तो उन्हें अपने उत्तरदायित्वों से विरक्त होने का बोध हुआ। कुलगुरु से शुभ मुहूर्त पूछने पर उत्तर मिला—“प्रभु के लिए हर क्षण शुभ है, किंतु आज का मुहूर्त 14 वर्ष बाद ही आएगा।”

राजा दशरथ ने तैयारी के लिए राज्याभिषेक को अगले दिन स्थगित किया—और वही ‘अगला दिन’ 14 वर्षों के वनवास में परिवर्तित हो गया। कथा वाचिका ने संदेश दिया कि जीवन में शुभ कार्यों को टालना नहीं चाहिए, समय का सदुपयोग ही सच्चा धर्म है।

कैकेयी प्रसंग: त्याग और नियति का रहस्य

सुश्री पाठक ने कैकेयी प्रसंग को भी भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कैकेयी का हृदय राम के प्रति अपार स्नेह से भरा था। प्रभु ने संकेत दिया कि राज्याभिषेक के समय वह भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगें।

कथा वाचिका ने कहा—“यदि लोक-निंदा सहकर भी किसी का जीवन उद्देश्य पूर्ण होता हो, तो वह त्याग महान होता है।”

इसके बाद राम-केवट संवाद, शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, मारीच वध, शबरी की नवधा भक्ति, संपाति वर्णन, बालि वध, सुग्रीव राज्याभिषेक, मेघनाद और कुंभकरण वध से होते हुए रावण संहार और अंततः श्रीराम राज्याभिषेक तक की झांकी गीतों और भजनों के माध्यम से प्रस्तुत की गई। वातावरण “जय श्रीराम” के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

जनप्रतिनिधियों व संतों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री भगवान पाठक, प्रधान संघ अध्यक्ष श्री जितेंद्र यादव, प्रवक्ता श्री दुर्गेश राय सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आज के कार्यक्रम के यजमान श्री दुर्गेश राय रहे।

यज्ञाचार्य श्री जय नारायण शास्त्री जी महाराज ने कथा वाचिका को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। कथा वाचिका ने भी श्री मनोज राय, बृज किशोर राय, हरे राम वर्मा, राजेश राय, जितेंद्र राय, सत्य प्रकाश राय, दीपू राय आदि को सम्मानित किया।

विशेष आशीर्वाद ब्रह्मचारी पीठाधीश्वर एवं महामंडलेश्वर श्री कृष्ण दास जी द्वारा प्रदान किया गया। साथ ही अद्वैत शिव शक्ति परमधाम के पीठाधीश्वर श्री शिवेंद्र ब्रह्मचारी (मौन व्रतधारी), श्री दामोदर दास महाराज, श्री कन्हैया दास जी महाराज, श्री बलिराम दास जी महाराज सहित सैकड़ों संत-महंतों की उपस्थिति से आयोजन दिव्य स्वरूप लेता गया।

अगले वर्ष हनुमान महायज्ञ की घोषणा

महायज्ञ के व्यवस्थापक श्री पंकज राय ने घोषणा की कि अगले वर्ष श्री हनुमान जी का भव्य महायज्ञ आयोजित किया जाएगा। इस घोषणा पर श्रद्धालुओं ने हर्ष व्यक्त किया।

कथा का मूल संदेश

कथा वाचिका का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट रहा—

समय की महत्ता समझना

शुभ कार्यों को टालने से बचना

त्याग, मर्यादा और धर्म पालन को जीवन में उतारना

रामराज्य की अवधारणा को आचरण में लाना

लीलकर की तपोभूमि पर भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का जो संगम दिखाई दिया, उसने क्षेत्र को राममय बना दिया। पूर्णाहुति के साथ यह महायज्ञ न केवल धार्मिक अनुष्ठान, बल्कि सामाजिक एकता और नैतिक जागरण का संदेश भी देगा।

जय श्रीराम।

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