कीर्तन से मिलती है आत्मिक शांति

 कीर्तन से मिलती है आत्मिक शांति


महाशिवरात्रि प्रवास में सिद्ध संत हरिहरानंद जी का संदेश: हरि कीर्तन से मिलती है आत्मिक शांति

सुखपुरा (बलिया)। 




महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सुखपुरा में आयोजित आध्यात्मिक प्रवास के दौरान सिद्ध संत हरिहरानंद जी ने हरि कीर्तन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलियुग में आध्यात्मिक जागृति, मानसिक शांति और ईश्वर से जुड़ने का सबसे सरल एवं सशक्त माध्यम हरि कीर्तन है। वे रविवार को हरेन्द्र नाथ उपाध्याय के आवास पर आयोजित सत्संग कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

संत हरिहरानंद जी ने कहा कि हरि कीर्तन मन को शुद्ध करता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और भक्ति व प्रेम भाव को जागृत कर आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। इससे जीवन के दुखों और मानसिक क्लेशों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि कीर्तन करने से मन शांत होता है, अवसाद में कमी आती है और घर-परिवार में सकारात्मक वातावरण बनता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान युग में जहां योग, तपस्या और कठोर साधनाएं सामान्य जन के लिए कठिन हो गई हैं, वहां हरिनाम संकीर्तन ईश्वर को प्रसन्न करने का सबसे सुलभ मार्ग है। यह भक्ति का सरल मार्ग है, जिसे कोई भी व्यक्ति अपनाकर आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।

संत ने आगे कहा कि कीर्तन आत्म-शुद्धि का माध्यम है। यह हृदय से विकारों को दूर कर प्रेम, करुणा और समर्पण की भावना को मजबूत करता है। जब भक्त सामूहिक रूप से ईश्वर के पवित्र नामों का स्मरण करते हैं, तो उनके बीच एकता और भाईचारे की भावना विकसित होती है।

उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि कीर्तन करने और सुनने वाले दोनों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। हरि कीर्तन को यदि नि:स्वार्थ भाव से किया जाए तो आत्मिक संतोष और मानसिक शांति की अनुभूति होती है।

कार्यक्रम में जिला सहकारी बैंक बलिया के चेयरमैन विनोद शंकर दूबे, पूर्व चेयरमैन अशोक कुमार पाठक, अमित उपाध्याय, जनार्दन उपाध्याय, ईश्वर दयाल मिश्रा, प्रवीण सिंह, अभिराम सिंह दारा, ब्लॉक प्रमुख भोला सिंह, अमित पाल सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष उमा शंकर पाठक, सच्चिदानंद तिवारी, राघवेन्द्र सिंह, वीर बहादुर सिंह, कमलेश कुमार तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। पूरे वातावरण में “हरि नाम” के जयघोष से भक्तिमय माहौल बना रहा।

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