बुढ़वा शिवमंदिर में हरिकिर्तन संपन्न

 बुढ़वा शिवमंदिर में हरिकिर्तन संपन्न, स्वयम्भू शिवलिंग पुनः स्थापना पर महंत ने दिया संदेश

सुखपुरा बलिया


कस्बा स्थित ऐतिहासिक बुढ़वा शिवमंदिर परिसर में आयोजित चौबीस घंटे के हरिकिर्तन का समापन गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। समापन समारोह के बाद हरिहरानंद जी महाराज द्वारा प्रवचन दिया गया, जिसमें उन्होंने शिवभक्ति, धर्मरक्षा और आस्था की शक्ति पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।

प्रवचन के दौरान उन्होंने मंदिर परिसर से चोरी किए गए स्वयम्भू शिवलिंग के विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि यह शिवलिंग स्वयम्भू है और चोरों द्वारा इसे काट लिए जाने के बाद भी यह खण्डित नहीं माना जाता। उनके अनुसार, “स्वयम्भू शिवलिंग को केवल उसके मूल स्थान पर पुनः आकार देकर स्थापित किया जाना चाहिए, क्योंकि शिवलिंग कभी खण्डित नहीं होता।” उन्होंने इस अपराध को अत्यंत घृणित कृत्य बताते हुए कहा कि ऐसे अधर्म करने वाले लोग कभी भी बच नहीं सकते। उन्होंने कहा कि “जो भी इस तरह का पापकर्म करता है, वह भगवान की दृष्टि में दंड से नहीं बचता। सत्य और धर्म की सदा विजय होती है।”

हरिहरानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में शिव-राम संबंध की आध्यात्मिक व्याख्या भी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि भगवान शिव स्वयं भगवान राम के अनन्य भक्त हैं। शिवजी ने हनुमान रूप में अवतार लेकर राम की सेवा का अवसर पाया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने भगवान राम की सेवा, भक्ति और शक्ति का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी भक्ति की महिमा के कारण हनुमान जी को कलियुग में भी अमर रहने और भक्तों को दर्शन देने का वरदान प्राप्त है।

महंत ने शिवजी के हनुमान बनने के प्रमुख कारणों को बताते हुए कहा कि शिवजी राम की सेवा में सदैव संलग्न रहना चाहते थे, इसी कारण उन्होंने हनुमान रूप में जन्म लिया, ताकि हर परिस्थिति में वे प्रभु राम का साथ दे सकें। प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने शांत भाव से कथा सुनी और ‘जय श्री राम’ व ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कार्यक्रम के समापन पर भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और शिवलिंग की पुनः स्थापना को लेकर प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की।

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