क्या कहेंगे लोग (लघुकथा)

  क्या कहेंगे लोग (लघुकथा)

प्रतापगढ़

जनकपुर गांव में राम मनोहर पाल नामक व्यक्ति रहता था। उसकी पत्नी का नाम सीता था। राम मनोहर मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करता था।उसके  बच्चे थे सबसे बड़ी बेटी थी उसका नाम खुशबू था।राम मनोहर की सोच संकीर्ण थी। वह सोचता था कि बेटियां घर का काम सीखे और बेटे स्कूल पढ़ने जाएं।उसकी इसी विचारधारा के कारण खुशबू का स्कूल में दाखिला नहीं हो पाया था। जिसके कारण खुशबू बहुत दुखी रहती थी और सोचती थी कि पिताजी को कैसे समझाएं कि उसे पढ़ना लिखना स्कूल जाना बहुत अच्छा लगता है।एक दिन

 वह हिम्मत करके अपने पिताजी से बोली कि पापा मुझे पढ़ने जाने दो मैं घर का भी काम कर लूंगी और पढ़ भी लूंगी लेकिन राम मनोहर को यह कतई पसंद नहीं था कि बेटियां घर से बाहर जाएं वह कहते थे कि अगर बेटी बाहर पढ़ने गई तो लोग क्या कहेंगे।खुशबू भाइयों को स्कूल जाते देखती तो मन ही मन सोचने लगती कि काश मैं भी स्कूल जा पाती।अपने पैरों पर खड़े होने के लिए शिक्षा कितनी आवश्यक है यह बात में पिताजी को कैसे समझाऊं।  भाई जब स्कूल से आता तो खुशबू उसकी कॉपी किताब लेकर बैठ जाती और उससे पढ़ना सीखती। एक दिन पिताजी घर पर नहीं थे खुशबू स्कूल चली गई और वहां की टीचर को अपनी सारी आपबीती बताई और बोली कि टीचर जी मुझे पढ़ना है आप मुझे पढाओगी। टीचर बोली हां बेटा क्यों नहीं। टीचर के अथक प्रयास के बावजूद राम मनोहर बेटी को स्कूल भेजने को तैयार न था। उसने कहा अगर बेटी स्कूल गई तो लोग क्या कहेंगे। जब खुशबू ने खाना पीना सब छोड़ दिया तब हार कर राम मनोहर ने हामी भरी और बोला कि सिर्फ पांचवी तक ही तुझे पढ़ना है आगे नहीं। खुशबू ने पांचवी में टॉप किया तो उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी सरकार ने ले ली और खुशबू हर क्लास में टॉप करते हुए यूपीएससी की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली खुशबू ने अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।तब राम मनोहर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसे पछतावा भी हुआ।

"किसी ने सच ही कहा है दुनिया का सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग".।

 


 सीमा त्रिपाठी

शिक्षिका साहित्यकार लेखिका

अध्यक्ष महिला शिक्षक संघ 

 लालगंज  प्रतापगढ़

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