बिरहन बना के डोलिया बइठा देलअ काहे, सनेहिया के धागा छोड़ गइलअ काहे।

बिरहन बना के डोलिया बइठा देलअ काहे,

सनेहिया के धागा छोड़ गइलअ काहे।

कलकत्ता

सनेहिया के धागा छोड़ गइलअ काहे,

पिरितिया लगा के भुला देलअ काहे।

बुझलअ ना बातिया, लोर टपकऽता अंखियाँ,

जियत-जियत हमके मुआ देलअ काहे।

खुद ही भुलवलअ साथ देखल सपनवा,

भोर भिनुसरवा बिसराइलअ काहे।

बिरहन बना के डोलिया बइठा देलअ काहे,

सनेहिया के धागा छोड़ गइलअ काहे।

निक ना लगनी कबो तोहरा के,

तब पिरितिया लगा के दगा देलअ काहे।

बुझलअ ना बुझवलो पर, रुकलअ न रुकवलो पर,

सबसे बढ़िके हमके पराया बना देलअ काहे।

निस्टूर बनइली, मनहीं-मनहीं किरिया खइली,

हमर नामो दिल से मिटा देलअ काहे।

नेहिया लगवली, तोरी देलअ काहे,

पल-पल हमके रुला गइलअ काहे।

सनेहिया के धागा छोड़ गइलअ काहे,

सूखल आँचरवा आँसू से भींजा गइलअ काहे।

पिरितिया लगा के दगा देलअ काहे,

जीते जी हमके मुआ देलअ काहे।
शोभा प्रसाद

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