पराया धन (अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं को समर्पित)
प्रतापगढ़
तुम लड़की हो पराया धन, तुम्हें एक ना एक दिन दूसरे के घर जाना है। ज्यादा हंसना नहीं, धीरे बोलो ,अच्छा तरीका सीखो, तुम्हें दूसरे के घर जाना है। अगर कोई लड़की अकेले बाहर आती जाती है तो लोग तंज कसते हैं। उसकी जिंदगी के सब जिम्मेदार बन जाते हैं और यदि उसकी पढ़ाई के लिए फीस कम पड़ जाए तो यह जिम्मेदार व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं। घर की रसोई में बेटियो को बचपन से ही मां का हाथ बटाने के लिए कहा जाता है।उनसे कहा जाता है कि तुम्हारे हाथ की सब्जी बहुत अच्छी लगती है तुम्हारे हाथ की रोटी बहुत अच्छी लगती है। यह सब कह कर उसको रसोई तक सीमित कर दिया जाता है ताकि वह रसोई का काम मन लगा कर करें। पैदा होते ही बेटियों को पराया धन कहकर उसके मन में अपनों से दूरी बनाई जाती है पिता के घर में पिता के अधीन थोड़ी बड़ी हुई तो भाई के अधीन शादी के बाद पति के अधीन और बुढ़ापे में बेटे के अधीन क्या यही नारी का अस्तित्व है जी नहीं नारी सामर्थवान और शक्तिवान है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां बेटियों ने अपना परचम ना लहराया हो। इसलिए बेटियों के प्रति सकारात्मक और सार्थक सोच बनाए।
शिक्षिका साहित्यकार लेखिका
लालगंज प्रतापगढ़


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