हाईकोर्ट आदेश पर चला बुलडोजर, विरोध के बाद कई लोग हिरासत में

 हाईकोर्ट आदेश पर चला बुलडोजर, विरोध के बाद कई लोग हिरासत में

सिकंदरपुर (बलिया)।
 तहसील सिकंदरपुर क्षेत्र के हथौज गांव में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची और कथित रूप से ग्राम सभा की जमीन पर बने मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान विरोध, हंगामा और झड़प की स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में तेजबहादुर राम पुत्र रामवचन, जानकी देवी, कोशिला, गायत्री, सुनीता, नीतू और हरिशंकर के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हथौज


गांव निवासी तेज बहादुर और रामवचन कई वर्षों से संबंधित भूमि पर मकान बनाकर रह रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें ग्राम सभा की ओर से आवास भी आवंटित किया गया था। हालांकि गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि उक्त मकान ग्राम सभा की ‘गड़ही’ (सरकारी जलभराव/सार्वजनिक भूमि) पर बने हैं। मामला न्यायालय में लंबित था, जिस पर हाल ही में आदेश पारित होने के बाद प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश मिले।

सोमवार को तहसीलदार सिकंदरपुर, नायब तहसीलदार तथा सिकंदरपुर, खेजुरी और मनियर थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। स्थिति को देखते हुए एक प्लाटून पीएसी और महिला पुलिस बल भी तैनात किया गया था। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मकान टूटता देख परिवार के लोग भावुक हो गए और उन्होंने विरोध जताया। आरोप है कि इसी दौरान तनाव बढ़ गया और कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिस का कहना है कि भीड़ को कई बार समझाया गया, लेकिन हालात काबू से बाहर होते देख हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान घरों में घुसकर तोड़फोड़ की और दरवाजे पर खड़ी मोटरसाइकिल व ई-रिक्शा को नुकसान पहुंचाया। कुछ महिलाओं, वृद्धों और बच्चों के साथ मारपीट के भी आरोप लगाए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान कुछ लोगों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें हाथ-पैर टूटने जैसी बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

गांव के समाजसेवी झारखंड राय ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। वहीं भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश महासचिव राम चौधरी ने भी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के साथ दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।

उधर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत की गई। उनका दावा है कि पथराव के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया गया। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक भी मौजूद रहे और स्थिति को नियंत्रित किया गया।

फिलहाल गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और मामले की विधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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