भागवत कथा का आध्यात्मिक रसपान

 भागवत कथा का आध्यात्मिक रसपान

भरखरा गांव में भागवत कथा का आध्यात्मिक रसपान, बच्चों की “माखन चोरी” झांकी ने मोहा मन

सुखपुरा (बलिया)।


 समीपवर्ती ग्राम भरखरा में लाला मिश्र के दरवाजे पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिला। काशी से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पंडित शीतल प्रकाश जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने गुरु की महिमा और धर्मग्रंथों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कथावाचक पंडित शीतल प्रकाश ने कहा कि “भागवत और भगवद्गीता जैसे महान ग्रंथों को समझने के लिए गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है। बिना गुरु के ज्ञान के, इन ग्रंथों का यथार्थ अर्थ समझ पाना अत्यंत कठिन है।” उन्होंने आगे कहा कि आज समाज में धर्म के पतन का मुख्य कारण लोगों का गुरु और ग्रंथों से दूर हो जाना है। जब मनुष्य जीवन में गुरु और धर्मग्रंथों का समावेश होता है, तब उसके भीतर समता, नम्रता, उदारता और प्रसन्नता जैसे दिव्य गुण स्वतः विकसित होने लगते हैं।

कथा स्थल पर भक्ति का वातावरण पूरे समय बना रहा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करते नजर आए। बीच-बीच में भजन-कीर्तन से माहौल और भी भक्तिमय हो उठा। कथा के दौरान एक विशेष आकर्षण गांव के बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित “माखन चोरी” की मोहक झांकी रही। छोटे-छोटे बच्चों ने वेशभूषा और अभिनय के माध्यम से कृष्ण की बाल सुलभ चंचलता को सजीव कर दिया। इस प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा।

प्रतिदिन की तरह तीसरे दिन भी कथा स्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी श्रद्धा के साथ कथा सुनते दिखाई दिए। कथा श्रवण के उपरांत भगवान की आरती तक भक्तों की भीड़ स्थल पर बनी रही। आयोजन स्थल को सुंदर ढंग से सजाया गया है, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक प्रतीत हो रहा है।

इस अवसर पर सरोज मिश्र, अशोक कुमार मिश्रा, प्रमोद कुमार मिश्रा, हीरामन राम, ग्राम प्रधान अजय राम, अशोक यादव, तेज नारायण यादव, बिजेंदर यादव, मनोज यादव, जोगिंदर धुसिया, रवि मिश्रा, शिवजी गुप्ता तथा सिद्धार्थ मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। ग्रामवासियों के सहयोग से यह धार्मिक आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूती मिलती है। कथा का आयोजन आगे भी प्रतिदिन जारी रहेगा, जिसमें अधिकाधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

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