₹1–₹2 के सिक्कों में उलझता बचपन

 ₹1–₹2 के सिक्कों में उलझता बचपन

₹1–₹2 के सिक्कों में उलझता बचपन: बेल्थरा रोड में भटकते कदम, संभलने की ज़िम्मेदारी हम सबकी

बिल्थरारोड /बलिया@



जिन नन्हे हाथों में किताबें, कॉपियाँ और कलम शोभा देनी चाहिए, वही हाथ आज रेलवे स्टेशन की बाउंड्री और नगर की गलियों में ₹1–₹2 के सिक्कों से जुआ खेलते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस कड़वी सच्चाई का आईना है, जिसमें बेल्थरा रोड का बचपन धीरे-धीरे नशे और भटकाव की राह पर बढ़ता जा रहा है।

नगर और स्टेशन के आसपास इन दिनों 8 साल से लेकर 15 साल तक के बच्चे सुलेशन और अन्य नशीले पदार्थों की गिरफ्त में फँसते नजर आ रहे हैं। दस रुपये में मिलने वाला सुलेशन उन्हें घंटों नशे की हालत में रखता है। नतीजा यह कि पढ़ाई से दूर होते ये बच्चे कभी सिक्कों से जुआ खेलते हैं, तो कभी पैसों के लिए छोटी-मोटी चोरी जैसी घटनाओं में भी शामिल हो जाते हैं। यह सब किसी एक परिवार या एक गली की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है।

कभी जिन दुकानों पर सुलेशन की बिक्री पर सख्त पाबंदी थी, आज वहीं खुलेआम इसकी बिक्री हो रही है। आसानी से उपलब्ध नशा बच्चों को उस दलदल में धकेल रहा है, जहाँ से निकल पाना कठिन हो जाता है। उभांव पुलिस कई बार बच्चों को नाबालिग समझकर डांट-फटकार कर छोड़ देती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल डांट से समस्या का समाधान हो जाएगा? या फिर हमें जड़ तक जाकर इलाज करना होगा?

सबसे चिंता की बात यह है कि सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे बच्चों को चिन्हित कर विद्यालय तक पहुँचाने की योजनाएँ मौजूद हैं। उद्देश्य साफ है—हर बच्चा स्कूल जाए, शिक्षा पाए और बेहतर भविष्य की ओर बढ़े। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि चिन्हित होने के बावजूद कई बच्चे फिर उसी माहौल में लौट जाते हैं, जहाँ नशा, जुआ और आवारगी उनका इंतज़ार कर रही होती है।

यहाँ ज़िम्मेदारी केवल प्रशासन या पुलिस की नहीं है। सबसे बड़ी भूमिका परिजनों, नगर पंचायत बेल्थरा रोड और समाज की है। माता-पिता को यह समझना होगा कि बच्चों पर ध्यान न देना उन्हें धीरे-धीरे अंधेरे की ओर ले जा रहा है। रोज़मर्रा की व्यस्तताओं के बीच बच्चों से बातचीत, उनकी संगत पर नज़र और स्कूल से जुड़ाव बेहद ज़रूरी है।

नगर पंचायत को भी चाहिए कि वह सामाजिक जागरूकता अभियान चलाए, दुकानों पर अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाए और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की नियमित निगरानी करे। मोहल्लों में रहने वाले जिम्मेदार नागरिक अगर एक कदम आगे बढ़ें, तो किसी बच्चे को गलत राह पर जाने से रोका जा सकता है।

आज जरूरत इस बात की है कि हम सब मिलकर यह तय करें कि बेल्थरा रोड का बचपन सिक्कों के जुए में नहीं, बल्कि सपनों की पढ़ाई में लगे। यह तभी संभव है जब समाज, प्रशासन और परिवार एक साथ आगे आएँ। क्योंकि अगर आज हमने इन बच्चों का हाथ थाम लिया, तो कल यही बच्चे हमारे नगर, जिले और देश का उज्ज्वल भविष्य बनेंगे।

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