आध्यात्मिक संदेश
करम्बर में श्रीमद्भागवत कथा से भक्ति रस की धारा, कथा व्यास विमल कृष्ण पाठक ने दिया आध्यात्मिक संदेश
ग्राम पंचायत करम्बर स्थित राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत केंद्र बनी हुई है। कथा का आयोजन श्रीमती आशा शुक्ला एवं श्री गंगाधर शुक्ला (श्री भोला शुक्ला) के सौजन्य से किया गया है। इस पावन अवसर पर वृंदावन धाम से पधारे भागवत रत्न, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा व्यास आचार्य पंडित विमल कृष्ण पाठक जी महाराज श्रद्धालुओं को कथा रस का पान करा रहे हैं।
कथा के दौरान आचार्य पाठक जी महाराज ने कहा कि भगवान की प्राप्ति का सबसे सहज साधन मन की निर्मलता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से छल, कपट और अहंकार का त्याग कर प्रभु का स्मरण करना चाहिए। जीवन में अपने आचरण को शुद्ध और पवित्र बना लेना ही सबसे बड़ा मंगलाचरण है।
कथा वाचन के क्रम में उन्होंने कुंती प्रसंग और भीष्म स्तुति का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने समझाया कि मनुष्य के पास चाहे कितना भी धन और ऐश्वर्य क्यों न हो, उसे अभिमान नहीं करना चाहिए। अभिमान ही व्यक्ति के पतन का मूल कारण बनता है।
आचार्य जी ने सनातन संस्कृति की महिमा बताते हुए कहा कि सनातन धर्म सेवा, प्रेम और सद्भाव का संदेश देता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि सनातन को केवल बाहरी प्रदर्शन का विषय न बनाएं, बल्कि उसे अपने हृदय में धारण करें। किसी भी धर्म की आलोचना न करते हुए सबके प्रति प्रेम भाव रखना ही सच्चे सनातनी की पहचान है।
भगवान के नाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु का नाम अत्यंत मंगलकारी है। जिस प्रकार अग्नि को जानबूझकर या अनजाने में छूने पर भी वह जलाती है, उसी प्रकार भगवान का नाम किसी भी भाव से लिया जाए, वह कल्याणकारी ही होता है। नाम जप से मन शुद्ध होता है और पापों का क्षय होता है।
कथा के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “राधे-राधे” के संकीर्तन पर श्रोता झूम उठे और पूरा पंडाल वृंदावन धाम जैसा प्रतीत होने लगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर रहे हैं और पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।
आयोजकों के अनुसार कथा सप्ताह भर चलेगी, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। यह आयोजन क्षेत्र में धर्म, भक्ति और संस्कारों की अलख जगा रहा है।


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