धरना
गंगा की नीलामी के विरोध में केवट-मल्लाहों का डीएम कार्यालय पर धरना, निरस्तीकरण की मांग
बलिया।
धरना दे रहे लोगों का कहना था कि गंगा नदी केवल एक नदी नहीं बल्कि वैदिक और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। इसके तटों पर सदियों से निषाद, केवट और मल्लाह समाज के लोग निवास करते आ रहे हैं। इन समुदायों की आजीविका का मुख्य साधन गंगा में नौका संचालन और पारंपरिक मत्स्य आखेट रहा है। अनादि काल से इनके पूर्वज इसी नदी पर आश्रित रहे हैं और इसी से परिवार का भरण-पोषण होता आया है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे पूर्व में 9 सितंबर 2025 और 9 अक्टूबर 2025 को भी जिलाधिकारी के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। नीलामी के कारण हजारों परिवारों की आजीविका छिन गई है और कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि गंगा नदी पर आश्रित लाखों लोगों के जीवन और जीविका की रक्षा के लिए गलत तरीके से और चुपके से की गई नीलामी प्रक्रिया को तत्काल रद्द किया जाए। साथ ही मांग की गई कि पारंपरिक मछुआरा समुदाय को उनके अधिकार वापस दिए जाएं और माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन के दौरान केवट व मल्लाह समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई। इस अवसर पर रमेश बिंद, ध्रुपन साहनी, लुकुड़ साहनी, धनू साहनी, गंगासागर साहनी, गुलाब चंद्र निषाद, संदीप निषाद, अशोक निषाद, तेज नारायण निषाद सहित सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चे मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों का आक्रोश साफ तौर पर झलकता रहा।



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