PGI थाने का दरोगा रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

 PGI थाने का दरोगा रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

लखनऊ(राष्ट्र की संपत्ति)

राजधानी लखनऊ में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत भ्रष्टाचार निवारण संगठन (ACB) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ACB ने PGI थाने में तैनात उपनिरीक्षक (दरोगा) अमर कुमार को ₹13,000 की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 20 दिसंबर 2025 को की गई, जिससे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपनिरीक्षक अमर कुमार ने एक प्रकरण में पीड़ित को राहत देने और अनुकूल कार्रवाई करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। पीड़ित व्यक्ति ने इस अवैध मांग से परेशान होकर भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ACB ने पहले पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद ACB ने ट्रैप टीम का गठन कर आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई।

योजना के तहत पीड़ित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और तय स्थान पर दरोगा को रिश्वत की रकम सौंपी जानी थी। जैसे ही आरोपी उपनिरीक्षक अमर कुमार ने PGI थाना क्षेत्र में रिश्वत की रकम ली, पहले से सतर्क ACB टीम ने उसे मौके पर ही रंगेहाथ दबोच लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से ₹13,000 नकद बरामद किए गए, जो उसने रिश्वत के रूप में लिए थे।

गिरफ्तारी के बाद ACB ने मौके पर ही सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। ACB अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस भ्रष्टाचार में कोई अन्य पुलिसकर्मी या बाहरी व्यक्ति तो शामिल नहीं था।

इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। ACB अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी पद पर रहते हुए जनता से रिश्वत मांगने या लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी अवैध रूप से रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना बिना डर के ACB को दें।

PGI थाने में तैनात दरोगा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में भी खलबली मची हुई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई संभव है और दोषियों को कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाएगा।

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