ब्रजेश पाठक–पीएम मोदी की ‘सीक्रेट’ मुलाकात से गरमाया राजनीतिक माहौल
यूपी की सियासत में बड़ा उलटफेर? ब्रजेश पाठक–पीएम मोदी की ‘सीक्रेट’ मुलाकात से गरमाया राजनीतिक माहौल
उत्तर प्रदेश की कड़ाके की ठंड के बीच प्रदेश की राजनीति अचानक गरमा गई है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सत्ता के गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा है—आखिर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मुलाकात के पीछे की असल वजह क्या है? यह भेंट सामान्य शिष्टाचार से कहीं आगे मानी जा रही है, क्योंकि इसके तार हाल में हुई उन बैठकों से जुड़ रहे हैं, जिन्होंने यूपी की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 23 दिसंबर से मानी जा रही है। उस दिन कुशीनगर से बीजेपी विधायक पीएन पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर एक ‘सहभोज’ आयोजित हुआ। औपचारिक तौर पर यह सामाजिक आयोजन था, लेकिन इसमें बीजेपी समेत विभिन्न दलों के करीब 40 ब्राह्मण विधायकों की मौजूदगी ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। प्रदेश में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 बीजेपी के हैं। इतने बड़े पैमाने पर ब्राह्मण विधायकों की एकजुटता को साधारण नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक ब्राह्मण समाज की बढ़ती राजनीतिक अपेक्षाओं और सत्ता में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश का संकेत थी। इससे पहले ठाकुर समाज और अन्य वर्गों की भी ऐसी बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन ब्राह्मण विधायकों की इस गोलबंदी ने सरकार और संगठन दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
इसी बैठक के करीब 72 घंटे बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का दिल्ली पहुंचना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करना चर्चा का केंद्र बन गया। ब्रजेश पाठक ने स्वयं सोशल मीडिया पर पीएम के साथ तस्वीर साझा कर इसे प्रेरणादायी भेंट बताया। आधिकारिक तौर पर कहा गया कि वे वाराणसी में होने वाली नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का निमंत्रण देने गए थे, लेकिन राजनीति में संयोगों को हमेशा संदेह की नजर से देखा जाता है।
जानकारों का कहना है कि इस मुलाकात में ब्राह्मण समाज की नाराजगी, विधायकों की अपेक्षाएं और आगामी चुनावी समीकरणों पर चर्चा हुई हो सकती है। ब्रजेश पाठक को बीजेपी में ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माना जाता है, ऐसे में उनका सीधे प्रधानमंत्री से संवाद उनकी राजनीतिक हैसियत को भी दर्शाता है।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब यूपी बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिला है और मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक है और पार्टी अपने कोर वोट बैंक को साधे रखने के लिए किसी भी स्तर पर रणनीति बनाने में जुटी है। विपक्ष इसे बीजेपी की अंदरूनी खींचतान बता रहा है, जबकि पार्टी के भीतर इसे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है।
अब सवाल यही है कि क्या ब्रजेश पाठक को कोई नई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है या फिर यूपी की सत्ता संरचना में कोई बड़ा बदलाव होने जा रहा है? फिलहाल इतना तय है कि इस मुलाकात ने प्रदेश की राजनीति में हलचल को और तेज कर दिया है।


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