मां तेरे आंचल में दुनिया सारी है, अपनी ममता तूने मुझ पर वारी है

मां तेरे आंचल में दुनिया सारी है,

अपनी ममता तूने मुझ पर वारी है


 प्यारी मां

लालगंज प्रतापगढ़

कुछ ढूंढ रही हूं दिल लगता क्यों खाली खाली।

ऐसा स्वाद कहीं नहीं जैसे मां की थाली,

प्यार भरे शब्दों से जब वह मुझे बुलाती,

मेरे जीवन बगिया की हर कली खिलाती,

कुछ ढूंढ रही हूं दिल लगता क्यों खाली खाली।

मां तेरे आंचल में दुनिया सारी है,

अपनी ममता तूने मुझ पर वारी है

धरती अंबर से भी ज्यादा तू प्यारी है,

सारे रिश्तो पर तेरी ममता भारी है,

कुछ ढूंढ रही हूं दिल लगता क्यों खाली खाली ।

जन्मदात्री ममतामयी कोई और नहीं,

तेरे हाथों का निवाला भूली नहीं,

तू ईश्वर का रूप तेरे चरणों में जन्नत,

तेरा आशीष मिले और कोई चाह नहीं,

कुछ ढूंढ रही हूं दिल लगता क्यों खाली खाली।

प्रेम अहिंसा त्याग तेरा श्रृंगार रहे,

तुझ पर मेरी मां मुझको अभिमान रहे,

सर्वप्रथम तेरी पूजा स्वीकार रहे,

इस जग में हे! मां तेरा सर्वोत्तम स्थान रहे,

कुछ ढूंढ रही हूं दिल लगता क्यों खाली खाली।

ऐसा स्वाद कहीं नहीं जैसे मां की थाली।

सीमा त्रिपाठी

शिक्षिका साहित्यकार लेखिका

लालगंज प्रतापगढ़

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