विनम्रता मानव का श्रेष्ठ आभूषण
सीमा त्रिपाठी
शिक्षिका साहित्यकार लेखिका
लालगंज प्रतापगढ़
विनम्रता को व्यक्ति के व्यक्तित्व का आभूषण भी कहा गया है
विनम्रता न केवल हमारे व्यक्तित्व में निखार लाती है बल्कि कई बार सफलता का कारण भी बनती है। विनम्रता से व्यक्ति का व्यक्तित्व सुंदर बनता है इसलिए विनम्रता को व्यक्ति के व्यक्तित्व का आभूषण भी कहा गया है। एक दिन समुद्र ने नदी से पूछा कि तुम पेड़ों को तो अपने साथ बहा ले जाती हो परंतु कोमल बेलों और नाजुक पौधों को तो वहीं छोड़ देती हो इस पर नदी बोली जब पानी का बहाव बढ़ता है तब बेल झुक जाती है और पानी को रास्ता दे देती है इसीलिए वह सुरक्षित बच जाती हैं। जबकि पेड़ तनकर खड़े रहते हैं इसलिए अपना अस्तित्व खो बैठते हैं। विनम्रता कायरता नहीं है यह व्यक्ति को शांत सहनशील शक्तिशाली तथा ऊर्जावान बनाती है। जिस मनुष्य के पास विनम्रता रुपी आभूषण नहीं है वह दैत्य के समान है। जीवन में ऊंचा उठने के लिए पंख नहीं विनम्रता की आवश्यकता होती है। विनम्रता व्यक्ति के भीतर छिपे अहंकार को नष्ट कर देती है। विनय अहंकार का शत्रु है। विनम्रता ही सुखी जीवन की आधारशिला है विनम्रता के कारण ही हम किसी भी कार्य को सरल व सहज तरीके से कर पाते हैं ।यह वह गुण है जो कि स्वयं को प्रेरित करता है और दूसरों को भी। संसार में कई लोग विनम्रता का गलत अर्थ समझ लेते हैं। उनका मानना है कि विनम्रता को झुकना कहते हैं परंतु उन्हें यह नहीं मालूम कि विनम्रता वह महान गुण है जो व्यक्ति को उन्नति की ओर ले जाता है।


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