शीर्षक- गंगा की स्वच्छता
सीमा त्रिपाठी
लालगंज अझारा प्रतापगढ़
गंगा तेरा पानी अमृत,
होती सारी सृष्टि संचित
शिव ने तुझे शिरोधार्य किया है
तूने पति तो का उद्धार किया है
तेरे जल प्रवाह में है कलरव
तू संस्कृति का है गौरव
गंगा की चीत्कार सुनो
कारखानों का मैलबंद करो
आज ना समझे तो क्या होगा
जल विहीन कलयुग होगा
बिन जल भूख प्यास से तड़पोगे
हरियाली युक्त प्रकृति को तरसोगे
सभी जागृत हो सहर्ष
जल की स्वच्छता पर हो विमर्श
संकल्प सभी को करना है
स्वच्छ गंगा को रखना है |
सीमा त्रिपाठी
लालगंज अझारा प्रतापगढ़


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