बाहर की दवाएं लिखे जाने के गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है
बलिया जिला अस्पताल में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखे जाने के गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जांच के बाद विभाग ने जिला अस्पताल में तैनात 32 चिकित्सकों को नोटिस जारी कर उनसे लिखित जवाब मांगा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ आगे कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं के बजाय बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अस्पताल की फार्मेसी में कई जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थीं, इसके बावजूद मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए पर्ची दी जा रही थी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे नियमों का उल्लंघन और मरीजों के हितों के साथ खिलवाड़ माना है। विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह नि:शुल्क या निर्धारित सरकारी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। बाहर की दवाएं लिखने से न केवल मरीजों पर अनावश्यक खर्च बढ़ता है, बल्कि सरकारी संसाधनों का भी दुरुपयोग होता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिला अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है और यदि किसी दवा की कमी होती है तो उसकी रिपोर्ट संबंधित स्तर पर दी जानी चाहिए। इसके बावजूद दवाएं बाहर से लिखना चिकित्सकीय आचरण और सरकारी नियमों के खिलाफ है। इसी कारण 32 चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि किन परिस्थितियों में उन्होंने बाहर की दवाएं लिखीं।
अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, वेतन कटौती या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराने पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद जिला अस्पताल प्रशासन में हलचल मची हुई है। मरीजों और उनके परिजनों ने विभाग के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरीजों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



0 Comments