लोकसभा में गूंजा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का मुद्दा
सलेमपुर सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने देवरिया-बलिया की सड़कों पर उठाए सवाल
सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री रमाशंकर विद्यार्थी ने 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने अतारांकित प्रश्न संख्या 1800 के माध्यम से केंद्र सरकार से वर्ष 2020 से 2025-26 तक के बीच देवरिया और बलिया जिलों में प्रस्तावित, स्वीकृत तथा निर्मित सड़कों का वर्षवार और सड़कवार विस्तृत ब्यौरा मांगा। साथ ही निर्माण कार्य में हो रहे विलंब के कारणों और शेष सड़कों के निर्माण की संभावित समय-सीमा के बारे में भी जानकारी चाही।
सांसद के प्रश्न के उत्तर में भारत सरकार के ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान की ओर से लगभग पांच पृष्ठों का विस्तृत पीडीएफ दस्तावेज सदन में प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत वर्षवार स्वीकृत एवं निर्मित सड़कों की लंबाई का विवरण साझा किया गया।
सांसद के मीडिया प्रभारी श्री जितेश कुमार वर्मा ने बताया कि यह प्रश्न क्षेत्र की आम जनता की आवागमन संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क सुगम न होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और दैनिक जीवन की गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पीएमजीएसवाई के विभिन्न घटकों के तहत निर्मित सड़कों की लंबाई में पिछले वर्षों में उतार-चढ़ाव देखा गया। वर्ष 2020-21 में 718 किलोमीटर सड़क निर्माण हुआ। वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 3368 किलोमीटर तक पहुंचा। वर्ष 2022-23 में 5011 किलोमीटर तथा 2023-24 में 6799 किलोमीटर सड़क निर्माण दर्ज किया गया, जो योजना के सुदृढ़ क्रियान्वयन को दर्शाता है।
हालांकि वर्ष 2024-25 में यह लंबाई घटकर 2808 किलोमीटर रह गई और वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर मात्र 517 किलोमीटर तक सिमट गया। इस गिरावट को लेकर सांसद ने चिंता व्यक्त की और कहा कि सड़क निर्माण की रफ्तार कम होने का सीधा असर ग्रामीण संपर्क व्यवस्था पर पड़ता है।
लोकसभा में बोलते हुए सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह गांवों को मुख्य मार्गों और एक जिले को दूसरे जिले से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्माण की गति में कमी से आमजन को असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिसका समाधान सरकार को प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
सदन में उठाया गया यह प्रश्न प्रदेश की सड़क विकास व्यवस्था पर गंभीर चर्चा का आधार बना है। इसे ग्रामीण संपर्क सुदृढ़ करने और अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।



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