जो चाहोगे वह पाओगे

 जो चाहोगे वह पाओगे 

प्रतापगढ़

सौम्या गांव की सीधी-सादी लड़की थी। उसे बचपन में मां बाप का प्यार नहीं मिला क्योंकि जब सौम्या बहुत छोटी थी तब एक दुर्घटना में मां-बाप की मृत्यु हो गई थी। बिना मां-बाप के उसको सारी दुनिया वीरान सी लगती थी। उसको अपने बड़े पापा से बहुत ज्यादा लगाव था। उसकी सारी आवश्यकता की पूर्ति उन्हीं के द्वारा होती थी। मां बाप के न होने का दर्द उसे हमेशा सताता रहता था। सौम्या का बचपन से ही पढ़ाई में बहुत मन लगता था। वह हर क्लास में प्रथम श्रेणी की छात्रा रही। समय बीतता गया और अब सौम्या सयानी हो गई थी। उसके बड़े पापा उसका रिश्ता तय करने में लग गए थे। कई रिश्ता देखा गया परंतु कोई ना कोई अड़चन आ 

 ही जाती थी। कुछ समय बाद एक दिन सौम्या को पता चला कि उसकी शादी तय हो गई है। दिन तारीख भी पक्की है। यह खबर सुनते ही सौम्या के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उसे लगा कि अभी उसको शादी नहीं करनी है यह बात बड़े पापा से कैसे कहूं। वह बहुत दुखी थी क्योंकि उसने तो पढ़कर कुछ बनने की ठानी थी। उसे लगा कि उसके सपनों पर पानी फिर गया। अब क्या होगा उसने सोचा मैं बड़े पापा को समझाती हूं।परंतु वह हिम्मत नहीं जुटा पाई। सौम्या की शादी गरीब घर के आठवीं पास लड़के से हो गई जो उम्र में सौम्या से बहुत बड़ा था। सौम्या के बड़े पापा ने शादी में यह शर्त रखी थी कि मेरे पास देने के लिए सिर्फ लड़की ही है। जैसे तैसे  समय बीतता गया। सौम्या की शादीशुदा जिंदगी नरक से भी बदतर हो गई थी। सौम्या के पति को उसका पढ़ना लिखना पसंद नहीं था। वह चाहता था कि सौम्या घर का कामकाज ठीक से करें। उसने दो-चार जानवर पाल रखे थे दूध बेचकर जो आमदनी होती थी उसी से उसका गुजारा होता था। एक दिन सौम्या के पति ने उससे झगड़ा किया और सौम्या को मारपीट कर घर से निकाल दिया। दुख की मारी सौम्या को समझ ही नहीं आ रहा था कि वह जाए तो जाए कहां? मन ही मन अपनी किस्मत को कोसती हुई सौम्या ने जिंदगी से लड़ने की हिम्मत जुटाई और उसने अपनी पढ़ाई फिर से जारी रखने की कसम खाई। उसने अपने सपने को हकीकत में बदलने की ठानी और जुट गई पढ़ाई में। किसी ने सत्य ही कहा है----" जो चाहोगे वह पाओगे" सौम्या घरों में काम करके पैसे इकट्ठा करती उसी से किताबें खरीदती।जिंदगी के रास्ते में अकेले चलने में उसे अनेक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा परंतु उसने अपने आत्मविश्वास  को लड़खड़ाने नहीं दिया। अथक प्रयास और अटूट लगन की बदौलत सौम्या ने यूपीएससी की परीक्षा पास की आज सौम्या दूसरी लड़कियों के लिए नजीर बन गई थी। अगर इंसान कुछ करने की ठान लेता है तो रास्ता कितना ही कठिन हो मंजिल प्राप्त कर ही लेता है। 
सीमा त्रिपाठी 

शिक्षिका साहित्यकार लेखिका 

लालगंज प्रतापगढ़

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