जब हो रही तलाश दवा दर्द की मगर,
वो दर्द ही दवा थी बताया नहीं गया
ग़ज़ल
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मेरी ✒️ से....
चन्दननगर, हुगली, पश्चिम बंगाल
अहसान जो किया वो भुलाया नहीं गया,
अहसास दिल से दिल का छुपाया नहीं गय।
जाने हुआ क्या जो यूं अंजान बन गये,
टूटा जो दिल मिरा तो दिखाया नहीं गया।
महफ़िल में रोज़ उन से मुलाकात हो रही,
गम-ए-हयात मुझ से सुनाया नहीं गया।
जब हो रही तलाश दवा दर्द की मगर,
वो दर्द ही दवा थी बताया नहीं गया।
जज़्बात की तो थी उन्हें कद्र ही कहां,
उल्फ़त के गीत देब तो गाया नहीं गया।
राखी देब (स्वरचित)
चन्दननगर, हुगली, पश्चिम बंगाल


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