पुण्यतिथि पर याद किये गए पत्रकार व अधिवक्ता

 पुण्यतिथि पर याद किये गए पत्रकार व अधिवक्ता

दिवंगत पत्रकार व अधिवक्ता सुनील कुमार की सातवीं पुण्यतिथि सादगी से मनाई गई

गड़वार (बलिया): 




ग्रामीण पत्रकारिता और अधिवक्ता जगत से जुड़े दिवंगत पत्रकार एवं एडवोकेट सुनील कुमार की सातवीं पुण्यतिथि सोमवार को गड़वार स्थित उनके आवास पर सादगीपूर्ण वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में परिजनों, पत्रकार साथियों, अधिवक्ताओं एवं क्षेत्रीय नागरिकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

ज्ञात हो कि स्वर्गीय सुनील कुमार ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के संस्थापक स्व. बालेश्वर लाल के सुपुत्र थे। उन्होंने अपने पिता की पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निष्पक्ष और निर्भीक लेखनी के माध्यम से समाज के दबे-कुचले और वंचित वर्ग की आवाज को बुलंद किया। साथ ही अधिवक्ता के रूप में भी उन्होंने सदैव न्याय और सत्य के पक्ष में कार्य किया। उनके व्यक्तित्व में सरलता, सहजता और मिलनसारिता का अद्भुत समन्वय था।

इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि गोष्ठी को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार सौरभ कुमार ने कहा कि स्व. सुनील कुमार का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का प्रतीक था। वे सदैव हंसमुख स्वभाव के रहे और कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच के साथ समाजहित में कार्य करते रहे। पत्रकार पीयूष कुमार ने कहा कि सुनील कुमार ने पत्रकारिता को कभी व्यवसाय नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम माना। उन्होंने अपनी लेखनी से हमेशा सच्चाई को सामने लाने का साहस दिखाया।

प्रशांत कुमार, शैलेन्द्र वर्मा तथा संतोष सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्व. सुनील कुमार गरीब एवं दीन-दुखियों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे। जरूरतमंदों की कानूनी सहायता करना हो या किसी सामाजिक मुद्दे को उठाना, वे हर समय अग्रणी भूमिका निभाते थे। उनके असामयिक निधन से पत्रकारिता और अधिवक्ता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।

कार्यक्रम में मुकेश चौहान, रितेश चौहान, बृजेश दुबे, विजय गुप्ता, मुकेश कुमार, अधिवक्ता अनिल भारती, लोकनाथ गुप्ता, अख्तर अंसारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और समाजसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

अंत में परिजनों ने उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। श्रद्धांजलि सभा शांतिपूर्ण और भावुक माहौल में संपन्न हुई, जहां उपस्थित लोगों की आंखें नम थीं और हृदय में स्व. सुनील कुमार की स्मृतियां ताजा हो उठीं।

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