अपनी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया जाय
शीर्षक- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
प्रतापगढ़
राधेश्याम पेशे से वकील थे| उनके पिताजी और माताजी भी प्रतिष्ठित पद पर थे | परिवार संपन्न और उच्च वर्ग की श्रेणी में आता था| राधेश्याम का विवाह बड़ी धूमधाम से किया गया| राधेश्याम की पत्नी सुंदर, सुशील तथा गुणवान थी | पूरे गांव में उसकी प्रशंसा होती थी | राधेश्याम की पत्नी अनीता ने जब पहली बेटी को जन्म दिया तब परिवार में सन्नाटा सा छा गया , सभी उदास हो गए थे | अनीता की कुंडली में दिखाई गई तो पता चला उसको 7 बेटियां होंगी बेटा तो इसकी कुंडली में है ही नहीं | सारे परिवार वालों पर तो जैसे बज्र टूट पड़ा हो सब चिंतित रहने लगे | जैसे तैसे दिन बीता अनीता को दूसरा बच्चा होने वाला था सब बेटे की आस लगाए बैठे थे अनीता ने दूसरी बेटी को जन्म दिया तो सारे घर में सन्नाटा छा गया | सास ससुर तो अनीता से सीधे मुंह बात करना ही छोड़ दिए जैसे सारा दोष अनीता का ही हो | समय बीतता गया अनीता फिर गर्भवती हुई बेचारी अंदर ही अंदर डर रही थी, कि हे भगवान इस बार क्या होगा फिर अपने मन को समझा रही थी कि जो अपने हाथ में है ही नहीं उसके लिए क्या सोचना | अनीता ने तीसरी बेटी को जन्म दिया परिवार के सारे सदस्य उससे बात करना ही बंद कर दिए | नवजात शिशु बेटी की शक्ल तक किसी ने नहीं देखी और न ही उसका ख्याल रखा | अनीता अपने को इन परिस्थितियों में बहुत मुश्किल से संभालती और सारी विपरीत परिस्थिति का सामना करते हुए अपनी बेटी के पालन पोषण में कोई कमी नहीं की | अनीता मन ही मन सोचती थी कि इनको कैसे समझाएं कि क्या बेटियां बेटों से कम है | समय बीतता गया अनीता चौथी बार गर्भवती हुई इस बार डर के मारे वह मायके चली गई कि अगर बेटी हुई तो क्या होगा | यह सोचकर उसकी रूह कांपने लगती थी | जब चौथी बार उसने बेटे को जन्म दिया सभी परिवार के लोग प्रसन्न होकर खुशियां मनाने लगे ढोल नगाड़े बजने लगे, लेकिन अनीता ने उसी दिन संकल्प किया कि मेरी बेटियां किसी से कम नहीं हैं | वह परिवार से लड़ झगड़ कर अपनी बेटियों को पढ़ाई, बेटों के बराबर प्यार दुलार दिया बेटियों को कभी महसूस नहीं होने दिया कि वह किसी से कम है | परिवार वालों से बगावत करके उसने अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा दी | जिसका परिणाम आज उसकी तीनों बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं | अपनी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया अनीता ने | आज अनीता की सोच की बदौलत उसकी बेटियां शिक्षित हुई और अपने पैर पर खड़ी हो सकी | आज भी कितनी अनीता अपनी बेटियों के लिए जूझ रही है | उन दकियानूसी विचारधारा के लोगों से हमें ऐसी महिलाओं का हौसला अफजाई करना चाहिएं
शिक्षिका साहित्यकार लेखिका
लालगंज प्रतापगढ़


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