सान बा, भगत सिंह, आ राजगुरु के, कुर्बानी पर, भारतवासी के, बहुत ही अभिमान बा!

कलकत्ता बंगाल

तीन रंग से बनल तिरंगा, भारत माँ भगत सिंह, आ राजगुरु के, कुर्बानी पर, भारतवासी के, बहुत ही अभिमान बा!

देश खतीर् जे मीट जाई, अपन करम प्रधान बा, तीन रंग से बनल तिरंगा, भारत माँ.......... २

जहाँ भोर में चहके चिरंई, सबेरे, हल चलावत किसान बा, रीत रिवाज अपना करम से ही, भारत के पहचान बा, तीन रंग से बनल तिरंगा भारत माँ.......... २

बाग बगईचा पपीहा बोले, जहाँ बसंत के बहार बा, तीन रंग से बनल तिरंगा, भारत माँ के सान बा !


दुस्मन के जवन छक्का छोरा दी, ऊ देश के वीर जवान बा, देश खतीर् अपन लहू बहावत, दुस्मन के भी करत लहू लुहान बा देश ला मिट जाला जवन ऊ, देश के माई के लाल बा, तीन रंग से बनल तिरंगा, भारत माँ के सान बा !


                        शोभा प्रसाद कलकत्ता बंगाल