🥀हम आँख में पानी भरकर, हँसना जानते हैं🥀
बलिया आजमगढ़ उत्तरप्रदेश
देने वाले कर कब, कुछ भी किसी से मांगते हैं।
हम आँख में पानी भरकर, हँसना जानते हैं।।
कह दिया जाए जो सबसे,
दर्द वो होता नहीं है।
जो पता चल जाए सबको,
मर्म वो होता नहीं है।
मन की थकन, तन की शिकन,
सब कुछ छुपाना जानते हैं।
हम आँख में पानी भरकर, हँसना जानते हैं।।
कंटकों के बीच खिलना,
और दलदल में पनपना
अक्षरों के ज्ञान के संग,
हमने सीखा पीर सहना
हम उसूलों के नियामक,
मानक पे चलना जानते है।
हम आँख में पानी भरकर, हँसना जानते हैं।।
कर्म के अतिरिक्त कुछ,
जाना नहीं, माना नहीं है।
हक़ का केवल चाहिए,
अतिरिक्त कुछ पाना नहीं है।
संकल्प सिद्धी का लिए,
हम सिद्ध करना जानते हैं।
हम आँख में पानी भरकर, हँसना जानते हैं।।
अन्त में देगा समर क्या,
कामनाएँ तय करेंगी
कृष्ण किसका साथ देंगे,
भावनाएँ तय करेंगी।
ज़िन्दगी के युद्ध भी हम,
बन 'बुद्ध' लड़ना जानतें हैं।


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